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आपका लिवर सही है या खराब? कंफ्यूज मत होईये जान लीजिए ख़राब लिवर के लक्षण, कारण, निदान व इलाज

icon-blog By -Dr. Kanika Sharma
icon-blog By -November 17, 2023
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लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इसको आम भाषा में यकृत व जिगर के रूप में भी जाना जाता है। यह पेट के दाहिनी ओर पसलियों के नीचे होता है। इसका सबसे मुख्य काम भोजन को पचाना और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना होता है। यह हमारे शरीर का एक ऐसा अंग है जो हार्मोन बनाता है यानी ये स्टोर हाउस या डी-टॉक्सिफिकेशन प्लांट की तरह है। ये शरीर का केंद्रीय अंग है। अगर लिवर स्वस्थ नहीं है तो हमारा शरीर सही काम नहीं कर पाएगा। लिवर की बीमारी जेनेटिक यानी आनुवांशिक भी हो सकती है और यह विभिन्न कारणों से भी हो सकती है। लिवर के ख़राब होने पर घाव के निशान आ सकते है जिसे सिरोसिस कहते है। लिवर जब ख़राब होना शुरू होता है तो कई प्रकार के लक्षण सामने आने लगते है। जिनको अधिकतर लोग नज़अंदाज़ कर देते है। जिसका खामियाज़ा उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है। अगर शुरू में ही इसके लक्षणों की पहचान कर ली जाएं तो इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में 100 मिलियन से अधिक लोगों को किसी न किसी रूप में लिवर की बीमारी है। इनमें अधिकतर को फैटी लिवर की बीमारी होती है। काफी लोगों को तो यह पता ही नहीं होता कि वे लिवर की बीमारी से पीड़ित है। भारत में हर साल क़रीब दो लाख लोगों की मौत लिवर की बीमारी से होती है। वहीं केवल 1,800 के आसपास ही लिवर ट्रांसप्लांट करवा पाते है।

कैसी कैसी होती है लिवर की बीमारी

लिवर रोग अलग-अलग व्यक्तियों को अलग-अलग प्रकार के हो सकते है। "फैटी लिवर" लिवर के ख़राब होने का सबसे मुख्य प्रकार है। इसके अलावा भी कई प्रकार के लिवर रोग हो सकते है। जैसे  हेपेटाइटिस ए, बी, सी , पीलिया, सिरोसिस, अल्कोहलिक हेपेटाइटिस,  हेमोक्रोमैटोसिस, अनुवांशिक लिवर रोग, गिल्बर्ट्स सिंड्रोम, लिवर कैंसर आदि प्रकार के लिवर रोग हो सकते है।

लिवर की बीमारी के लक्षण?

लिवर की बीमारी होने पर कई तरह के लक्षण सामने आते है। आमतौर पर यह लक्षण रोग के प्रकार व कारणों पर निर्भर करते है। इसके सबसे सामान्य लक्षण इस प्रकार है।  

- लिवर की बीमारी होने पर पीड़ित रोगी के पैरों में सूजन आ जाती है। 

- त्वचा और आंखों में पीलापन आने लगता है। 

- अक्सर पीड़ित रोगी को पेट में दर्द और सूजन की शिकायत रहती है।  

- त्वचा में खुजली होने लगती है। 

- पेशाब का रंग गहरा होता जाता है।

- मल का रंग गहरा होने लगता है। साथ ही साथ मल में खून आना भी शुरू हो जाता है।

- पीड़ित व्यक्ति को थकान का अनुभव होने लगता है। 

- अक्सर मतली और उल्टी की शिकायत होने लगती है।

- आमतौर पर भूख नहीं लगती है या बहुत कम लगती है।

- छोटे-मोटे काम को करते हुए भी चोट लगने की संभावना अधिक रहती है। 

लिवर की बीमारी के कारण

लिवर की बीमारी के अनेक कारण हो सकते है। यह बीमारी अनुवांशिक भी हो सकती है। आमतौर पर यह बीमारी निम्नलिखित कारणों से होती है। 


संक्रमण होने पर

कई बार ऐसा होता है कि हमारा लीवर वायरस से संक्रमित हो जाता है। जिसकी वजह से लिवर पर सूजन और उसकी कार्यक्षमता कम हो जाती है। यह संक्रमण किसी प्रकार के वायरस रक्त या वीर्य, ​​दूषित भोजन, दूषित पानी या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी फैल सकती है। हेपेटाइटिस वायरस लिवर संक्रमण का सबसे प्रचलित कारण है। इनमें मुख्य रूप से हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी आदि से संक्रमण फैल जाता है। आमतौर पर संक्रमण के बाद लीवर की बीमारी कई प्रकार से  हो सकती है। जैसे लंबे समय तक शराबबंदी, लिवर में वसा यानी फैट का निर्माण ओवर-द-काउंटर या प्रिस्क्रिप्शन दवाएं, कुछ विशेष प्रकार की हर्बल सामग्री आदि। 

इम्यून सिस्टम की शिथिलता

लीवर की बीमारी ऑटोइम्यून बीमारियों से प्रभावित भी हो सकती है। आमतौर पर ऐसा तब होता है जब प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के विशेष अंगों पर हमला करती है। इनमे हेपेटाइटिस ऑटो-इम्यून, पित्तवाहिनीशोथ प्राथमिक, स्क्लेरोजिंग चोलैंगाइटिस आदि शामिल है। 

आनुवंशिक

लिवर की बीमारी आनुवंशिक यानी जेनेटिक भी हो सकती है। यदि आपको अपने माता  या पिता से दोषपूर्ण जीन प्राप्त हुआ है तो लिवर में कई हानिकारक पदार्थों के निर्माण हो सकता है जिससे लिवर की बीमारी हो सकती है। आनुवंशिक लिवर की बीमारियों में हेमोक्रोमैटोसिस, विल्सन की बीमारी, अल्फा-1, ऐन्टीट्रिप्सिन की कमी, लिवर ट्यूमर, पित्त नली का कैंसर आदि कारण हो सकते है। 

लिवर की बीमारी के जोखिम कारक

लिवर की बीमारी के कई अन्य कारक भी हो सकते है। इनमें सबसे प्रमुख कारक इस प्रकार है। 

  • ज्यादा शराब पीना
  • मोटापा होना
  • मधुमेह होने पर
  • बॉडी आर्ट या पियर्सिंग
  • संक्रमित सुइयों के संपर्क में आने से
  • संक्रमित व्यक्ति का खून चढ़ने से
  • संक्रमित लोगों के शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क में आने से
  • अम्लीय पदार्थों के संपर्क में आने से
  • जिगर की बीमारी का आनुवंशिक होने से। 

लिवर की बीमारी का निदान?

लिवर की बीमारी के उचित इलाज के लिए ज़रूरी है कि इसका निदान सही समय पर हो जाएं। आमतौर पर डॉक्टर लिवर रोग का निदान आपकी मेडिकल हिस्ट्री और संपूर्ण शारीरिक परीक्षण से शुरू कर सकते है। उसके बाद रोग की गंभीरता व प्रकार के आधार पर आगे की जांच की जा सकती है। आमतौर पर डॉक्टर इसके निदान के लिए निम्नलिखित परीक्षण करा सकते है -

ब्लड टेस्ट

डॉक्टर कई प्रकार के ब्लड का टेस्ट करा सकते है। आमतौर पर लिवर फंक्शन टेस्ट यानी केएफटी परीक्षण के एक समूह का उपयोग लिवर रोग के निदान के लिए किया जाता है। इसके अलावा रक्त परीक्षण विशिष्ट लिवर समस्याओं या अनुवांशिक स्थितियों को देखने के लिए किए भी किया जा सकता है।

इमेजिंग टेस्ट

लिवर की बीमारी होने पर अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई  जैसे परीक्षण भी किए जा सकते है। इससे यह पता चल जाता है कि लिवर को किस हद तक नुकसान पहुंच चुका है।  

बायोप्सी विश्लेषण

लिवर की बीमारी का निदान करने के लिए बायोप्सी भी की जा सकती है। इसमें लिवर से ऊतक का एक नमूना लिया जाता है और उसे परीक्षण के लिए लैब में भेजा जाता है।  जिससे लिवर की बीमारी का निदान आसानी से हो जाता है। 

लिवर की बीमारी का इलाज

लिवर की बीमारी का इलाज आमतौर से रोग की गंभीरता व उसके कारणों पर निर्भर करता है। प्रत्येक प्रकार के लिवर रोग का विशिष्ट उपचार होता है। गंभीर रोग होने पर लिवर ट्रांसप्लांट भी किया जा सकता है। पित्ताशय की पथरी वाले रोगियों के उपचार के लिए पित्ताशय की थैली को हटाने के लिए सर्जरी कि ज़रूरत हो सकती है। हेपेटाइटिस ए में पर्याप्त पानी प्रदान करने के लिए सहायक देखभाल की आवश्यकता होती है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण को ठीक करती है। सिरोसिस और लिवर रोग के लास्ट स्टेज वाले रोगियों के लिए अवशोषित प्रोटीन की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए दवाओं की आवश्यकता हो सकती है। वॉटर रिटेंशन को कम करने के लिए कम सोडियम वाला खाने और मूत्रवर्धक दवाओं की आवश्यकता होती है।

कई मामलों में ऑपरेशन की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार लिवर से संबंधित अन्य बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए लंबे समय तक चिकित्सा व देखभाल की ज़रूरत हो सकती है। कई मामलों में तो लिवर ट्रांसप्लांट भी किया जाता है।  इस प्रक्रिया में ख़राब लिवर को किसी म्रत या जीवित व्यक्ति के लिवर से बदला जाता है। एक प्रकार से यह अंतिम विकल्प होता है।

कैसे करें बचाव

  • लिवर की बीमारी से बचने के लिए हमें कुछ विशेष उपाय अपनाने की ज़रूरत होती है। अगर हम इन उपायों का पालन करते है तो काफी हद तक लिवर की बीमारी से बच सकते है। आमतौर पर जिन उपायों को अपनाना ज़रूरी है वे इस प्रकार है। 
  • अगर आप शराब का सेवन करते है तो उसे बिल्कुल बंद कर दें। 
  • यदि आप नशीली दवाओं का इस्तेमाल करते है या ड्रग्स लेते है तो उन्हें बंद कर देना चाहिए। विशेषकर इंजेक्ट की गई सुइयों को बिल्कुल भी साझा न करें।  
  • सेक्स करते समय कंडोम का उपयोग अवश्य करें।
  • यदि आपको हेपेटाइटिस से संक्रमित होने का खतरा है या आप पहले हेपेटाइटिस वायरस से संक्रमित हो चुके है तो टीकाकरण ज़रूर कराए। 
  • अन्य लोगों के रक्त और शरीर के तरल पदार्थ के साथ संपर्क में आने से बचें। 
  • कीटनाशक और अन्य जहरीले रसायनों का इस्तेमाल करते समय दस्ताने व अन्य ज़रूरी सामान पहनें। 
  • अपने वज़न को न बढ़ने दे इससे लिवर फैटी हो सकता है। वज़न को मैनेज करने के लिए आप आयुष्कार के "वेट लॉस" कैप्सूल का प्रयोग कर सकते है। ये आयुर्वेदिक कैप्सूल है जिनका किसी प्रकार का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है। 

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लिवर खराब होने के लक्षण क्या है?

लिवर खराब होने पर टखनों और पैरों में सूजन आ जाती है। त्वचा और आंखें में पीलापन आने लगता है। खुजली, मतली व उल्टी की शिकायत होती है। मल व पेशाब का रंग गहरा हो जाता है।  

कैसे पता करें कि लीवर खराब हो रहा है या नहीं?

लीवर खराब हो रहा या नहीं इसका निदान करने के लिए लिवर फंक्शन टेस्ट यानी केएफटी आमतौर पर किया जाता है। इसके अलावा कई प्रकार के इमेजिंग टेस्ट जैसे एमआरआई और  बायोप्सी भी की जा सकती है।   

लिवर कमजोर होने से क्या परेशानी होती है?

अगर लिवर स्वस्थ नहीं है तो हमारा शरीर सही प्रकार से काम नहीं कर पाएगा। लिवर के कमजोर होने से न तो भोजन सही से पच पाएगा और न ही शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल पाएंगे।

लिवर खराब होने पर कहां दर्द होता है?

आमतौर पर लिवर खराब होने पर पीड़ित रोगी को पेट में दर्द की शिकायत रहती है। 

 

 

 

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